स्मृतियों के प्रमुख खंड

 मैं आपको इन 18 प्रमुख स्मृतियों को तीन मुख्य खंडों के आधार पर व्यवस्थित करके बताता हूँ।

1. आचार खंड (जीवन का सामान्य आचरण, संस्कार, गृहस्थ धर्म, आश्रम-व्यवस्था, व्रत, दान, शुद्ध-अशुद्ध)

ये स्मृतियाँ समाज, परिवार और व्यक्तिगत आचरण पर अधिक केंद्रित हैं:

मनु स्मृति – धर्म, वर्ण व्यवस्था, गृहस्थ जीवन, राजा का कर्तव्य।

आपस्तंब स्मृति – विवाह, श्राद्ध, संस्कार, आश्रम धर्म।

गौतम स्मृति – आचार और प्रायश्चित्त का प्राचीन विवेचन।

बौधायन स्मृति – गृहस्थ धर्म और शुद्ध-अशुद्ध पर विशेष बल।

वशिष्ठ स्मृति – तप, दान, स्त्री-धर्म और प्रायश्चित्त।

पाराशर स्मृति – कलियुग धर्म, गृहस्थ जीवन के नियम, प्रायश्चित्त और व्रत।

शंख स्मृति – राजा और समाज के आचरण नियम।

लिखित स्मृति – गृहस्थ धर्म और सामान्य आचार।

हरित स्मृति – धर्म और प्रायश्चित्त संबंधी नियम।

अंगिरस स्मृति – पितृ-श्राद्ध, तर्पण, व्रत-विधान।

विश्वामित्र स्मृति – व्रत, दान और तप के विधान।

दक्ष स्मृति – यज्ञ, संस्कार और शुद्ध-अशुद्ध।

2. व्यवहार खंड (न्याय, दंड, राजा का धर्म, साक्ष्य, कानून और शासन व्यवस्था)

ये स्मृतियाँ "हिंदू विधिशास्त्र" की रीढ़ हैं:

याज्ञवल्क्य स्मृति – तीन खंडों में से व्यवहार खंड सबसे महत्वपूर्ण; न्याय, कानून और प्रायश्चित्त व्यवस्थित।

नारद स्मृति – शुद्ध रूप से विधि-ग्रंथ; न्यायालय, साक्ष्य, विवाद समाधान, दंड।

कात्यायन स्मृति – न्याय और दंड विधान पर केंद्रित।

बृहस्पति स्मृति – न्यायशास्त्र और सामाजिक व्यवहार।

उशनस् (शुक्र) स्मृति – राजनीति, शासन, कूटनीति और प्रशासन।

3. प्रायश्चित्त खंड (पाप शुद्धि, प्रायश्चित्त, तप, प्रायशोधन के नियम)

इनका केंद्र दोष निवारण और तप है:

यम स्मृति – प्रायश्चित्त और तप पर केंद्रित।

(ध्यान रहे: कई अन्य स्मृतियों में भी प्रायश्चित्त अध्याय मिलते हैं, जैसे मनु, वशिष्ठ, पाराशर, परंतु यम स्मृति पूरी तरह इसी विषय पर विशेष है।)

  संक्षेप में:

आचार खंड – जीवन जीने के नियम (11 स्मृतियाँ)

व्यवहार खंड – कानून, राजा, न्याय (5 स्मृतियाँ)

प्रायश्चित्त खंड – दोष निवारण और तप (1 प्रमुख स्मृति + अन्य में आंशिक)



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